Nationalism in India Class 10 Notes in Hindi: भारत में राष्ट्रवाद नोट्स, आंदोलन और तिथियाँ
कक्षा 10 इतिहास के भारत में राष्ट्रवाद अध्याय के हिंदी नोट्स: आंदोलन, तिथियाँ और नेता।
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- मुख्य बातें
- Nationalism in India Class 10 Notes in Hindi: युद्ध के बाद राष्ट्रवाद
- सत्याग्रह का विचार
- रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग
- असहयोग आंदोलन (1920–22)
- सविनय अवज्ञा की ओर
- नमक यात्रा और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
- सविनय अवज्ञा की सीमाएँ
- सामूहिक अपनेपन की भावना
- महत्वपूर्ण तिथियाँ
- भारत में राष्ट्रवाद के उत्तरों में आम गलतियाँ
- भारत में राष्ट्रवाद के नोट्स कैसे दोहराएँ
- भारत में राष्ट्रवाद कक्षा 10 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- समापन
ये nationalism in india class 10 notes in Hindi बताते हैं कि पहले विश्व युद्ध के बाद भारत में जन-आंदोलन कैसे बढ़ा।
यह अध्याय कक्षा 10 इतिहास की पुस्तक “भारत और समकालीन विश्व-II” का है।
इसमें गांधीजी का आगमन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और साझा राष्ट्रीय भावना का विकास आता है।
अध्याय में तिथियाँ और कारण-परिणाम बहुत हैं, इसलिए साफ़ क्रम ज़रूरी है।
सबसे पहले संक्षिप्त सार पढ़िए।
फिर हर आंदोलन को क्रम से समझिए।
अंत में तालिका और FAQ दोहराइए।
Nationalism in India Class 10 Notes in Hindi: युद्ध के बाद राष्ट्रवाद
युद्ध से भारत में नई स्थिति बनी।
सबसे पहले सरकार ने रक्षा खर्च बढ़ाया और कर्ज़ लिए, इसलिए कर बढ़े।
फिर 1913 से 1918 के बीच कीमतें दोगुनी हो गईं, जिससे गरीब परेशान हुए।
इसी बीच गाँवों से लोगों को जबरन सेना में भर्ती किया गया।
अंत में 1918–21 में फसल खराब हुई और इन्फ्लुएंज़ा महामारी फैली, जिससे लाखों लोग मरे।
इसलिए लोगों को युद्ध के बाद राहत की उम्मीद थी।
लेकिन अंग्रेज़ों ने और दमनकारी क़ानून लाए।
इसी गुस्से ने गांधीजी को नए तरह का आंदोलन चलाने का अवसर दिया।
सत्याग्रह का विचार
महात्मा गांधी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।
वे मानते थे कि सत्य और अहिंसा से अन्याय को हराया जा सकता है।
उन्होंने इस तरीके को सत्याग्रह कहा।
इसमें हथियार नहीं चाहिए थे, इसलिए आम लोग भी जुड़ सके।
उन्होंने तीन स्थानीय संघर्षों में इसे आज़माया।
- चंपारण (1917): उन्होंने किसानों को उस दमनकारी बागान व्यवस्था के विरुद्ध प्रेरित किया, जो उनसे नील उगवाती थी।
- खेड़ा (1917): उन्होंने उन किसानों का साथ दिया जो फसल खराब होने पर लगान नहीं दे पा रहे थे।
- अहमदाबाद (1918): उन्होंने बेहतर मज़दूरी के लिए सूती मिल मज़दूरों की हड़ताल का नेतृत्व किया।
रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग
1919 में सरकार ने जल्दबाज़ी में रॉलेट एक्ट पास किया।
इसके तहत पुलिस बिना मुकदमे के लोगों को गिरफ़्तार कर सकती थी और दो साल तक बंद रख सकती थी।
इसलिए गांधीजी ने 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी सत्याग्रह शुरू किया।
हड़तालों और सभाओं से शहर बंद हो गए, और अंग्रेज़ों ने बल से जवाब दिया।
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में भीड़ जमा हुई।
जनरल डायर मैदान में घुसा, उसने निकास बंद कर दिया और सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दिया।
सैकड़ों लोग मारे गए।
इसके परिणामस्वरूप पूरे देश में गुस्सा फैल गया।
लेकिन गांधीजी ने सत्याग्रह रोक दिया, क्योंकि वह कुछ जगह हिंसक हो गया था।
असहयोग आंदोलन (1920–22)
गांधीजी ने इसे खिलाफ़त से क्यों जोड़ा
कई भारतीय मुसलमान तुर्की के सुल्तान, यानी खलीफ़ा, के साथ कठोर व्यवहार से दुखी थे।
गांधीजी को हिंदुओं और मुसलमानों को जोड़ने का अवसर दिखा।
इसलिए उन्होंने खिलाफ़त के मुद्दे को स्वराज, यानी स्व-शासन, की माँग से जोड़ दिया।
आंदोलन में क्या-क्या शामिल था
कांग्रेस ने दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में योजना मंज़ूर की।
लोगों से कहा गया कि वे ब्रिटिश उपाधियाँ छोड़ें और परिषदों, अदालतों, स्कूलों व विदेशी माल का बहिष्कार करें।
साथ ही लोगों ने विदेशी कपड़े जलाए और खादी कातना शुरू किया।
आंदोलन इस विचार पर टिका था कि ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से ही चल रहा था।
अलग-अलग समूहों की भागीदारी
- मध्य वर्ग: वकीलों ने वकालत छोड़ दी, और विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए।
- किसान: अवध में बाबा रामचंद्र ने ज़मींदारों और ऊँचे लगान के विरुद्ध संघर्ष चलाया।
- आदिवासी: गुडेम पहाड़ियों में अल्लूरी सीताराम राजू ने उग्र आंदोलन चलाया, जो गांधीजी की अहिंसा से मेल नहीं खाता था।
- बागान मज़दूर: असम में उन्होंने बागान छोड़ दिए, क्योंकि उन्हें लगा कि गांधी राज आने वाला है।
असहयोग का अंत
फरवरी 1922 में उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी।
बाईस पुलिसकर्मी मारे गए।
गांधीजी को लगा कि आंदोलन हिंसक हो गया है, इसलिए उन्होंने उसे वापस ले लिया।
इसी बीच सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू जैसे कुछ नेताओं ने परिषदों के भीतर काम करने के लिए स्वराज पार्टी बनाई।
सविनय अवज्ञा की ओर
कई घटनाओं ने देश को फिर सड़कों पर ला दिया।
1928 में साइमन कमीशन संवैधानिक सुधारों का अध्ययन करने आया, पर उसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था।
इसलिए लोगों ने उसका स्वागत “साइमन वापस जाओ” के नारे से किया।
फिर दिसंबर 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज, यानी पूर्ण स्वतंत्रता, की माँग की।
अंत में कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का फ़ैसला किया।
नमक यात्रा और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
गांधीजी ने नमक को प्रतीक चुना, क्योंकि हर घर को नमक चाहिए था और सरकार उस पर भारी कर लगाती थी।
12 मार्च 1930 को उन्होंने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से नमक यात्रा शुरू की।
वे लगभग 240 मील पैदल चलकर 24 दिन में डांडी पहुँचे।
वहाँ 6 अप्रैल को उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाकर नमक क़ानून तोड़ा।
इस बार लोगों से सिर्फ़ असहयोग नहीं, बल्कि औपनिवेशिक क़ानून तोड़ने को भी कहा गया।
इसलिए हज़ारों लोगों ने नमक बनाया, विदेशी कपड़े का बहिष्कार किया, कर देने से इनकार किया और शराब की दुकानों पर धरना दिया।
महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
उद्योगपति और व्यापारी भी मदद करते रहे, हालाँकि वे व्यापार पर लगी पाबंदियों में ढील चाहते थे।
लेकिन मार्च 1931 के गांधी–इरविन समझौते के बाद आंदोलन धीमा पड़ गया।
गांधीजी लंदन में दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में गए, पर वार्ता विफल रही, इसलिए उन्होंने 1932 में आंदोलन फिर शुरू किया।
सविनय अवज्ञा की सीमाएँ
हर समूह एक ही तरह से नहीं जुड़ा।
कई दलित, जिन्हें पाठ में “दमित वर्ग” कहा गया है, राजनीतिक अधिकार चाहते थे।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने पृथक निर्वाचिका की माँग की।
गांधीजी ने इसका विरोध किया, इसलिए उन्होंने उपवास शुरू किया।
सितंबर 1932 के पूना समझौते ने दमित वर्गों को केंद्रीय विधान परिषद में आरक्षित सीटें दीं, पर उनका चुनाव सामान्य निर्वाचिका ही करती थी।
कुछ मुस्लिम नेताओं को भी अलग-थलग महसूस हुआ।
इसी तरह बड़े उद्योगपति और मज़दूर वर्ग कई बार दूर रहे।
अतः आंदोलन ने सबको बराबर नहीं जोड़ा।
सामूहिक अपनेपन की भावना
राष्ट्रवाद सिर्फ़ आंदोलनों से नहीं बढ़ा।
प्रतीकों और कहानियों ने भी एकता की भावना बनाई।
- भारत माता: अबनींद्रनाथ टैगोर ने इस छवि को चित्रित किया, और बंकिमचंद्र ने वंदे मातरम् लिखा, जो आंदोलन का गीत बना।
- लोककथाएँ: रवींद्रनाथ टैगोर और नटेसा शास्त्री ने राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए लोककथाएँ इकट्ठी कीं।
- ध्वज: 1921 में गांधीजी ने चरखे वाला तिरंगा झंडा बनाया।
- इतिहास: लेखकों ने भारत का गौरवशाली अतीत दिखाकर गर्व जगाया।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह |
| 1919 | रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग |
| 1920 | असहयोग आंदोलन शुरू |
| 1922 | चौरी-चौरा |
| 1928 | साइमन कमीशन का आगमन |
| 1930 | नमक यात्रा और सविनय अवज्ञा |
| 1932 | पूना समझौता |
भारत में राष्ट्रवाद के उत्तरों में आम गलतियाँ
- विद्यार्थी नमक यात्रा का वर्ष गलत लिख देते हैं, इसलिए यात्रा के लिए 1930 और पूना समझौते के लिए 1932 याद रखिए।
- कई लोग असहयोग और सविनय अवज्ञा को मिला देते हैं, जबकि पहले में इनकार था और दूसरे में क़ानून तोड़ना।
- कुछ लोग खिलाफ़त का संबंध भूल जाते हैं, जो 3 अंक का पसंदीदा प्रश्न है।
- अध्याय में कई नाम हैं, इसलिए हर नेता के लिए एक पंक्ति का नोट बनाइए।
- लंबे उत्तर लिखते समय कारण, घटनाएँ और परिणाम तीनों शामिल कीजिए।
भारत में राष्ट्रवाद के नोट्स कैसे दोहराएँ
पहले दिन एक पन्ने की समय-रेखा बनाइए।
फिर दूसरे दिन रॉलेट, खिलाफ़त, चौरी-चौरा और पूना समझौते पर छोटे उत्तर लिखिए।
अंत में तीसरे दिन हर आंदोलन का एक लंबा उत्तर अभ्यास कीजिए।
और अध्याय देखने हों, तो कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स या पूरा कक्षा 10 नोट्स हब देखें।
अगर दोहराव बार-बार टल रहा हो, तो टालमटोल कैसे रोकें पढ़ें।
भारत में राष्ट्रवाद कक्षा 10 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 10 में भारत में राष्ट्रवाद क्या है?
यह पहले विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीयों में साझा राष्ट्रीय भावना का विकास है।
यह गांधीजी के नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों से बढ़ा।
रॉलेट एक्ट का विरोध क्यों हुआ?
1919 का रॉलेट एक्ट सरकार को बिना मुकदमे के गिरफ़्तारी और दो साल तक नज़रबंदी की छूट देता था।
भारतीयों ने इसे अन्यायपूर्ण माना, इसलिए गांधीजी ने इसके विरुद्ध सत्याग्रह चलाया।
खिलाफ़त आंदोलन क्या था?
यह भारतीय मुसलमानों का आंदोलन था, जो पहले विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफ़ा के साथ कठोर व्यवहार का विरोध करता था।
गांधीजी ने हिंदू–मुस्लिम एकता के लिए इसे असहयोग आंदोलन से जोड़ा।
गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस क्यों लिया?
फरवरी 1922 में चौरी-चौरा में भीड़ ने थाना जला दिया और बाईस पुलिसकर्मी मारे गए।
गांधीजी को लगा कि आंदोलन हिंसक हो रहा है, इसलिए उन्होंने उसे वापस ले लिया।
More Questions About Nationalism In India Class 10 Notes In Hindi
नमक यात्रा क्या थी?
यह साबरमती से डांडी तक 24 दिन की यात्रा थी, जो 12 मार्च 1930 को शुरू हुई।
गांधीजी ने 6 अप्रैल को नमक क़ानून तोड़ा, और इससे सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ।
पूना समझौता क्या था?
सितंबर 1932 का पूना समझौता गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के बीच हुआ।
उसने पृथक निर्वाचिका की जगह दमित वर्गों को विधान परिषदों में आरक्षित सीटें दीं।
सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलन में क्या अंतर है?
असहयोग में लोगों से सरकार के साथ सहयोग न करने को कहा गया, जैसे स्कूलों और अदालतों का बहिष्कार।
सविनय अवज्ञा आगे बढ़कर क़ानून तोड़ने को कहती थी, जैसे नमक क़ानून।
समापन
Nationalism in India class 10 notes in Hindi में एक क्रम दिखता है: कष्ट से गुस्सा बना, गांधीजी ने उसे तरीका दिया, और हर आंदोलन ने संघर्ष का आधार बढ़ाया।
तिथियाँ सीखिए, हर घटना को कारण और परिणाम से जोड़िए और नेताओं पर छोटे नोट रखिए।
फिर कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान श्रेणी से आगे बढ़िए, या The Note होमपेज पर लौटिए।
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